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District - Raipur

इतिहास और स्थापना

छत्तीसगढ़ के दिल में बसा रायपुर वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राजधानी है। ये राज्य का सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला और महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। इस शहर का अपना एक इतिहास है। इसे रतनपुर के कलचुरी राजा रामचंद्र ने 14वीं शताब्दी के अंतिम काल में बसाया था।
 

पर्यटन स्थल

प्रदेश‌ की राजधानी होने के नाते जो खूबियां किसी भी शहर में होती है वो सब रायपुर में भी है।इसके अलावा भी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशे जारी हैं।रायपुर पूरी तरह से सड़क, रेल और वायु मार्ग से जुड़ा है। मंत्रालय, पुलिस मुख्यालय, कलेक्टर और दूसरे सभी ज़रूरी प्रशासनिक कार्यालयों के अलावा यहां पर्यटन के भी पर्याप्त स्थान है।

 

राजिम

महानदी, राजीव लोचन मंदिर, रामचंद्र जग्गन्नाथ मंदिर, कुलेश्वर और सोमेश्वर मंदिर। इतने मंदिरों के कारण राजिम को मंदिरों का शहर कहा जाता है। यह महानदी, पैरी और सोंढूर नदी के संगम स्थल पर मौजूद है इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। प्रमुख मंदिर कमलनयन भगवान विष्णु को समर्पित है इसलिए इसे 'राजीव लोचन' मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के 12 खंभों के बाहरी भाग पर अष्टभुजी दुर्गा, गंगा और यमुना की लंबी एकल प्रतिमाएं उकेरी गई हैं साथ ही बड़ी बारीकी से विष्णु, राम, वराह और नरसिंह की प्रतिमाओं को उकेरा गया है। यहीं बोधिवृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए भगवान बुध्द की प्रतिमा भी है।


 

आरंग

मांडदेवल (जैनमंदिर), बाघेश्वर मंदिर, ऐतिहासिक अवशेष


 

चंद्रखुरी

चंद्रखुरी में एक प्राचीन शिव मंदिर है लेकिन जो यहां की दूसरी विशेषता है वो यहां कौश‌ल्या मंदिर का होना है। माता कौश‌ल्या कयोंकि कोसल प्रदेश‌ की ही थी और छत्तीसगढ़ का पुराना नाम कोसल प्रदेश‌ था इसलिए यहां एक बहुत बड़े तालाब के बीचोबीच माता कौश‌ल्या का मंदिर बनाया गया है। संभवत: ये देश‌ का एकमात्र कौश‌ल्या मंदिर है। शायद इन्हीं सब कारणों से छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल भी कहा जाता है।

 

तुरतुरिया

रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर वन क्षेत्र में बसा तुरतुरिया, एक वन गांव है। इसे सुरसुरी भी कहते हैं जो गंगा नाम के झरने के किनारे बसा है। पुरातत्व और मानवशास्त्र की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है। यहां ईसा पश्चात आठवीं शताब्दी के बौध्द काल और उसके बाद बाह्मण काल के महत्वपूर्ण अवशेष हैं। यहां सुन्दर नक्काशी वाले खंभे, स्तूप, स्नान घाट, शिवलिंग, चार हाथ वाले विष्णु और गणेश की मूर्तियां पाई गई हैं। जनश्रुतियों और किंवदंतियों के अनुसार तुरतुरिया नामक स्थान को महर्षि बाल्मिकि का जन्म स्थान माना जाता है। हालांकि इस बात के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलते लेकिन कुछ बातें हैं जो ऐसी बातों को बल देती हैं। तुरतुरिया नामक स्थान चारों ओर से ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरा है। पहाड़ियों से कलकल बहती नदी की धारा इस शांत वातावरण की निस्तब्धता को तोड़ती है। जो ऋषि मुनियों के लिए तपस्या करने का उपयुक्त स्थान है।

 

पलारी

पलारी में ईंटों से बना सिध्देश्वरी मंदिर मौजूद है।


 

रविशंकर जलाश्य

आसपास के पूरे खेती वाले स्थान में सिंचाई के लिए जलापूर्ति की दृष्टि से महानदी पर बना रविशन्कर जलाश्य‌ बहुद्देशीय बांध हैं।

 

बूढ़ा तालाब

वैसे तो पूरा रायपुर शहर छोटे-बड़े तालाबों से भरा है। इनमें सबसे प्रमुख है-बूढ़ा तालाब। इस तालाब के बीचोबीच एक बगीचा बना है। 2005 में इस बगीचे में युवाओं के आदर्श, स्वामी विवेकानंद की विशाल मूर्ति स्थापित की गई। शाम के समय रोशनी में नहाई ये मूर्ति यहां आने वालों के आर्कषण का खास केन्द्र रहती है।


 

दूधाधारी मठ

बूढ़ा तालाब के नज़दीक ही दूधाधारी मठ है। इसका निर्माण राजा जैतसिंह द्वारा 17 वीं शताब्दी में कराया गया था। मान्यता है कि यहां के मठ प्रमुख केवल दूध का ही सेवन करते थे इसलिए इस मठ का नाम दूधाधारी मठ पड़ा।

 

भांडदेवल जैनमंदिर

इस मंदिर के निर्माण का समय लगभग 11-12 वीं शताब्दी का है। मंदिर के बाहरी भाग को वास्तु शिल्प, मूर्तियों, फूलों, घोड़ों, और लोगों की सुन्दर आकृतियों से सजाया गया है। मंदिर के अंदर तीन जैन तीर्थंकरों की विराट मूर्तियां हैं जो बढ़िया पॉलिश किये, हरापन लिए कालेपत्थर से बनाई गई है। मूर्तियों को महीन और कलाकृति के सुन्दर चौखटे में रखा गया है।

 

चंपारण

चंपारण वैष्णव संप्रदाय के प्रतीक, वल्लभ संप्रदाय के पर्वतक और 15 वीं शताब्दी के सुधारक, वल्लाभाचार्य की जन्मस्थली है। गोस्वामी वल्लाभाचार्य के अनुयायिओं ने उनकी याद में बीसवीं सदी कें प्रथम दशक में एक मंदिर भी बनवाया।


 

शिव मंदिर देवबलोदा

भुरभुरे बलुआ पत्थर से बना भगवान शिव का ये मंदिर रायपुर से 20 किमी0 दूर है। गर्भगृह में विष्णु के अवतारों की मूर्तिया रखी हैं जिनमें विष्णु के वामन, नरसिंह, वराह और मुरली वाले कृष्ण को दर्शाया गया है। शैव, गणेश और सरस्वती की मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं।

 

नंदनवन

इस पार्क को पिकनिक स्पॉट के तौर पर विकसित किया गया है। बड़े-बड़े लॉन, बच्चों के खेलने के लिए मैदान और छोटा सा चिड़ियाघर भी बनाया गया है। यह खारून नदी के किनारे बसा है।

 

गिरोधपुरी

सतनामी समाज का यह धार्मिक स्थल संत घासीदास की जन्मस्थली है। जिन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना की थी। रायपुर से 135 किमी की दूरी पर स्थित इस स्थान पर वार्षिक समारोह तथा फरवरी से मार्च के महीने में पांच से सात दिन तक चलने वाला नृत्य समारोह भी दर्शनीय‌ हैं।

 

पहुंचने के साधन

रायपुर, दिल्ली, भुवनेश्वर, भोपाल और जबलपुर से हवाई सेवा से जुड़ा है।
मुंबई-नागपुर-हावड़ा रेलमार्ग पर मौजूद यह शहर दक्षिण पूर्व रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है।
रायपुर, राष्ट्रीय राजमार्ग-06 (मुंबई-नागपुर-कोलकता) और नम्बर 43 (विजयानगरम) से जुड़ा हुआ है।
 

ठहरने की व्यवस्था

HOTEL

HOTEL MAYURA - 0771 2536001 03, 4030539
HOTEL BABYLON - 0771 4093101
HOTEL CELEBRATION - 0771 4092990 -92, 4092649
HOTEL CHHATTISGARH - 0771 4066423, 6549010
REST HOUSE

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महत्वपूर्ण संपर्क नंबर


कलेक्टर - 0771 2426024 2882450
एसएसपी - 0771 4240304 4240306
पीआरओ - 0771 2229406 2229405
सीएमओ - 0771 2535315 2435304

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